हैलो ओरायन.....
सर्दियाँ शुरू होते ही रात को आसमान में सबसे अलग संरचना वाला ओरायन (Orion) तारामंडल दिखाई देने लगा है (चित्र 1).
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| ओरायन (Orion) तारामंडल (चित्र 1) |
आपने अक्सर 'मृगशीर्ष नक्षत्र' का नाम सुना होगा, वो यही है। ये तारामंडल सिर्फ सर्दियों में दिखाई देता है क्योंकि गर्मियों में पृथ्वी इस तारामंडल की बिपरीत दिशा में सूर्य के पीछे रहती है। लेकिन सूर्य के चक्कर काटते हुए जैसे ही पृथ्वी अपनी कक्षा के दूसरे हिस्से में पहुँचती है वैसे ही ये तारामंडल दिखाई देने लगता है। क्योंकि तब पृथ्वी और इस तारामंडल के बीच में सूर्य नहीं होता है। (चित्र 2)
दिल्ली में प्रदूषण के कारण ये दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में तो दिखना मुश्किल है। लेकिन गाँव-देहात या छोटे शहरों में, जहाँ आसमान साफ़ है वहां इसे आसानी से देखा जा सकता है। पूरब दिशा की ओर मुँह करने पर हमारी दायीं ओर यानि दक्षिण दिशा में आसमान में इसे देखा जा सकता है। मुख्य रूप से सात तारोँ के समूह वाले इस तारा मंडल की संरचना इतनी अलग और स्पष्ट है कि इसे देखने के लिए बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ती। इस तारामंडल में दो तारे ऊपर, दो तारे नीचे और बीच में तीन तारों का समूह है।
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| (चित्र 2) |
ओरायन तारामंडल सिर्फ अलग संरचना के लिए ही रोमांचित नहीं करता, ये अपनी प्रकृति में भी बहुत रोमांचक है।.........ओरायन में आप तारों को बनते और नष्ट होते हुए देख सकते हो।
ओरायन तारामंडल को थोड़ा ध्यान से देखेंगे तो इसके सबसे ऊपर, बायीं ओर का तारा थोड़ा लाल रंग (Red Giant Star) का दिखेगा। और सबसे नीचे, दायीं ओर का तारा थोड़ा नीला (Blue Giant Star) दिखाई देगा। ये दोनों तारे ख़त्म हो रहे हैं। (जब कोई तारा अपनी अंतिम अवस्था में पहुँच जाता है तो उसका आकार बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और वो लाल या नीले रंग का हो जाता है। तारों की इसी अवस्था को खगोलीय भाषा में लाल दानव या Red Giant और नीला दानव या Blue Giant कहते हैं।) ये दोनो तारे अपनी अंतिम अवस्था में पहुँच चुके हैं।
अगर आकार की बात करें तो ये दोनों तारे कितने बड़े हैं ?......... यूँ समझ लो अगर हमारा सूर्य एक मटर के दाने के बराबर है तो नीला तारा (Blue Giant) मिट्टी के घड़े के बराबर है और लाल तारा (Red Giant) ट्रैक्टर के पिछले टायर जितना बड़ा है (चित्र 3 और 4). यानि हमारा सूर्य मटर के दाने के बराबर है तो लाल तारा ट्रैक्टर के पिछले टायर जितना बड़ा है।....... है न एक दम शानदार, जबरदस्त, जिंदाबाद.......
एक समय ऐसा आएगा जब ये लाल तारा फैलते-फैलते एक धमाके से फट जाएगा। वैज्ञानिकों का मत है कि तब यह हमारी पृथ्वी में पूर्णिमा के चाँद से भी तेज चमकता हुआ दिखेगा। यानि उस समय रात को हमारे आसमान में दो चाँद दिखाई देंगे।
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| (चित्र 3) |
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| (चित्र 4) |
ये तो थी नष्ट होने वाली बात अब थोड़ा निर्माण की बात भी कर लेते हैं.......... ओरायन तारामंडल में तारे सिर्फ नष्ट ही नहीं हो रहे हैं वहां पर नए तारे भी बन रहे हैं। इस तारामंडल के बीच में देखेंगे तो आपको एक सीधी पंक्ति में तीन तारों का समूह दिखाई देगा उसे 'ओरायन बेल्ट' कहते हैं। ओरायन बेल्ट के ठीक नीचे ध्यान से देखने पर आपको खड़ी रेखा (vertical line) में कुछ धुंधले से तारे दिखाई देंगे।....... यही धुंधले गैस के बादल इकठ्ठा होकर तारे बनते हैं। यानि जब आप उन धुंधले तारों को देखोगे तो इसका मतलब है आप अपनी नग्न आँखों से तारे बनते हुए देख रहे हो।
अब अगली बार आप रात को आसमान में जब इस तारामंडल को देखेंगे तो आपका तारों को देखने का अनुभव पहले से कुछ अलग होगा। और वैसे भी कहते हैं न......
"रात का आसमान बहुत ही रोमांचक होता है, यदि आपको पता चल जाए कि आप देख क्या रहे हो।"




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