रविवार, 22 अप्रैल 2018

क्या भारत को राष्ट्रमंडल समूह से खुद को अलग नहीं कर लेना चाहिए ?

कॉमनवेल्थ या राष्ट्रमंडल खेलों में हमारे खिलाड़ियों के पदक जीतने की खबरें आयी। अच्छी बात है। लेकिन सोचने वाली बात ये है कि आखिर भारत राष्ट्रमंडल देशों के समूह में जुड़ा ही क्यों है ? राष्ट्रमंडल समूह में मुख्य रूप से वो देश हैं जो कभी ब्रिटेन के गुलाम थे, हालांकि अभी इसमें एक-दो देश ऐसे भी जुड़ गए हैं जो कभी ब्रिटेन के गुलाम नहीं रहे। मगर मूल रूप से ये ब्रिटेन के गुलाम देशों का समूह है। और इस समूह देशों का प्रमुख ब्रिटिश ताज होता है। यानी ब्रिटेन की महारानी या महाराज।.......

अब सवाल उठता है कि हम क्यों ब्रिटेन की गुलामी की निशानी को ढोते फिरें। हमें जरूरत क्या है राष्ट्रमंडल देशों के समूह में रहने की ? क्या इससे हमको कोई पैसा मिलता है ? या इसके समूह में हमको व्यापार में किसी भी प्रकार की कोई सुविधा मिलती है ? कुछ नहीं, ये सिर्फ और सिर्फ ब्रिटेन के कलंक को सिर में चिपका के रखने वाली बात है।...... भारत ब्रिक्स, शार्क जैसे दुनिया भर के व्यापारिक समूह बनाकर अलग-अलग देशों से व्यापारिक सुविधाएं प्राप्त करता है मगर राष्ट्रमंडल समूह से हमें कुछ नहीं मिलता।...... होता बस ये है कि हर दो साल में इसके सदस्य देशों के मुखिया बैठक करते हैं और हर चार साल में इसके खिलाड़ी खेलते हैं। और खेलते भी कैसे हैं..... जैसे ओलंपिक खेलों से पहले दुनिया भर के देशों में ओलंपिक मशाल लेकर दौड़ा जाता है वैसे ही राष्ट्रमंडल खेलों से पहले सभी राष्ट्रमंडल देशों में ब्रिटेन की महारानी के प्रतीक 'क्वीन्स बैटन' नाम के दंड को लेकर दौड़ लगाई जाती है। मतलब राष्ट्रमंडल खेलों को ओलंपिक की तरह महान खेल आयोजन बनाया जाता है।...... वाह वाही किसकी हो रही है ? ब्रिटेन की महारानी की..... हमको क्या मिल रहा है ? कुछ नहीं। तो हम क्या पागल हैं जो गुलामी के इस कलंक को लेकर ढोते फिर रहे हैं।

जब ब्रिटेन भारत से जा रहा था तभी उसने भारत सरकार से कहा था कि वो चाहें तो कॉमनवेल्थ देशों के समूह में रह सकता है और चाहे तो नहीं। मगर भारत सरकार में उस समय कांग्रेस की पिलपिली सरकार थी जो अंग्रेजों को पूरी तरह छोड़ना नहीं चाहती थी इसलिए वो कॉमनवेल्थ समूह में जुड़ गई, लेकिन अभी तो खुद को राष्ट्रवादी कहने वाली भाजपा की सरकार है, शर्म की बात है कि ये सरकार अभी तक कांग्रेस की तरह ब्रिटेन का कलंक माथे में लगा कर घूम रही है।....... सरकार को कांग्रेस की तरह पिलपिला नहीं बनना चाहिए और जल्द से जल्द इस राष्ट्रमंडल के ड्रामे से भारत को बाहर निकाल देना चाहिए।

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