रविवार, 19 जुलाई 2015

क्या हम दक्षिण से कुछ सीख सकते हैं ?

हम उत्तर भारतीय लोगों को दक्षिण भारतीयों से बहुत कुछ सीखना चाहिए। हमने तो पश्चिमी संस्कृति का अंधाधुंध अनुसरण किया ये सोचकर कि इससे हम पश्चिम के लोगों की तरह ही होशियार हो जाएंगे और उनकी तरह हमारा भी विकास तेजी से होने लगेगा। पश्चिम की नक़ल करते - करते हम अपनी भाषा और संस्कृति से कटते चले गए। जब कि हमारी तुलना में दक्षिण भारतीयों ने पश्चिम का ऐसा अंधा अनुसरण नहीं किया। वो आज भी अपने राज्यों की संस्कृति का सम्मान हम उत्तर भारतीयों से ज्यादा करते हैं और राज्य ही क्यों अपने देश की संस्कृति की शुद्धता को वास्तव में उन्होंने ही बचा कर रखा हुआ है। उन्होंने हमारी तरह भाईचारे और उदारवाद का ढोंग करते हुए अपनी संस्कृति का बेड़ा गर्क नहीं किया। चाहे तो उनके पहनावे को देख लें, खान - पान को देख लें या उनकी फिल्मों को देख लें। हर जगह भारतीय संस्कृति की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। वो हमारी तुलना में अपनी संस्कृति का पालन ज्यादा करते हैं। मगर हम उत्तर भारतीयों ने अपनी भाषा, पहनावा और कला का नाश मारके रखा हुआ है। और ये हरकतें हम उदारवादी और बड़ी सोच के नाम पर करते हैं। अब भाषा का ही उदाहरण देख लें, हम कहने को तो हिंदी बोलते हैं मगर वास्तव में क्या हम हिंदी ही बोलते हैं ? नहीं ! हम बोलते हैं खिचड़ी भाषा। थोड़ी तुर्की, थोड़ी अरबी, थोड़ी फ़ारसी, थोड़ी पुर्तगाली और पता नहीं क्या - क्या मिलाकर एक घोल तैयार कर दिया। और कहते हैं इसे हिंदी। और मजेदार बात तो ये कि उन दक्षिण भारतीय लोगों से भी हम अपेक्षा करते हैं कि एक भारतीय होने के नाते हमें एक भाषा का प्रयोग करना चाहिए। हम सभी को हिंदी का प्रयोग करना चाहिए। अरे भई पहले खुद तो ढंग से हिंदी बोलो। उसके बाद उन्हें ज्ञान देना। अब पता नहीं इस तरह अपनी भाषा - संस्कृति को चौपट करके हमने कितना विकास किया होगा। अगर विकास की बात करें तो अपनी संस्कृति का अनुसरण करते हुए भी दक्षिण भारतीय हमसे ज्यादा विकसित हैं। चाहे कला की बात कर लो चाहे विज्ञान की। हर और उनका ही डंका बज रहा है। कला की यदि बात करें तो कला के जिस रूप से हम सभी सामान्यतः परिचित हैं वो है फ़िल्म। अब फिल्मों को ही देख लें, दक्षिण की फ़िल्में बॉलीवुड की फिल्मों से ज्यादा कलात्मक और तकनीकी रूप से दमदार होती हैं। और यही नहीं बॉलीवुड में भी दक्षिण भारतीय फ़िल्म निर्माताओं ने अपनी धाक जमाई है। और अगर विज्ञान की बात करें तो हम सभी को पता है कि देश में सबसे ज्यादा वैज्ञानिक उपलब्धियां दक्षिण के ही नाम रही हैं। ऐसे ही नहीं वहां इसरो का मुख्यालय बना और न यूं ही नहीं वह इंजीनियरों का गढ़ बना। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें