मोटोरोला वो कंपनी है जिसने सबसे पहले मोबाइल फोन बनाया मगर मोबाईल बाजार में उसका प्रभाव घटते - घटते आज स्थिति यह हो गई कि वो माइक्रोसॉफ्ट के द्वारा खरीद ली गई। नोकिया वो कंपनी है जिसकी अभी कुछ वर्षों पहले तक विश्व बाज़ार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी थी मगर फिर पिछले कुछ वर्षों में उसकी हिस्सेदारी घटती चली गई और अब वो गूगल के द्वारा खरीद ली गई है। सैमसंग वो कंपनी है जिसकी आज से दस साल पहले तक जिस समय मोबाइल कारोबार में नोकिया का डंका बज रहा था उस समय सैमसंग की मोबाइल बाज़ार में हिस्सेदारी नाममात्र थी। मगर आज सबसे ज्यादा मोबाइल फोन सैमसंग बेच रही है।
इन तीनों प्रसंगों से हमें ये सीखने को मिलाता है कि मोटोरोला की तरह किसी क्षेत्र में सबसे पहले शुरुआत करने का यह मतलब नहीं कि उस क्षेत्र में हमारा बर्चस्व बन जाएगा। और नोकिया के प्रसंग से हमें ये सीखने को मिलता है कि किसी क्षेत्र में अगर हमारा बर्चस्व बन गया है तो वो हमेशा ऐसा ही बना रहेगा ये जरुरी नहीं। सैमसंग का प्रसंग हमें सिखाता है कि यदि सही रणनीति से आगे बढ़ा जाए तो सबसे आखिरी में कदम बढ़ाने वाला भी सबसे दूर तक जा सकता है।
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