उन्हें आज तकलीफ हो रही है क्यों कि उनके पिता स्व. राजीव गांधी जी के हत्यारों की सजा माफ़ी पर विचार हो रहा है। वो अपना दुःख प्रकट कर रहे हैं कि उन्हें देश के लोगों की तकलीफ भी समझ में आती है। वो कह रहे हैं कि जब देश के प्रधानमंत्री के हत्यारों को सजा नहीं मिल पा रही है तो देश के और लोगों को न्याय कैसे मिलेगा ? और जब वो ऐसा कहते हैं तो वो खुद ही सवालों के घेरे में आ जाते हैं। हर और से उँगलियाँ उनकी ओर ही उठने लगी है उनसे पूछा जा रहा है कि जिस आधार पर उन हत्यारों को अब माफ़ करने पर विचार हो रहा है वो आधार आखिरकार तैयार किसने किया ? निश्चित रूप से उनकी ही सरकार ने। बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम में अब राजनीति होती जा रही है मगर इसके राजनैतिक और कानूनी पक्ष के इतर इसे एक दूसरे नजरिये से भी देखा जा सकता है और वो ये कि ये सब समय का खेल है। चोट जब खुद पर लगती है तब पता चलता है दर्द किसे कहते हैं। अब जब उन्हें लग रहा है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है तब वो रो रहे हैं। मगर दूसरों के साथ जब उनकी सरकार अन्याय कर रही थी तब उन्होंने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
अन्याय उस दिन भी हुआ था जब छह साल की बच्ची से बलात्कार करके उसे मार देने वाले व्यक्ति की फांसी की सजा माफ़ कर दी गई। अन्याय उस दिन भी हुआ था जब मोलाईराम और संतोष यादव जैसे लोगों की सजा माफ़ कर दी गई थी। ये दोनों मध्यप्रदेश की जेल में कैदी थे और इन दोनों ने जेलर की बेटी से जेल परिसर में ही गैंग रेप करके उसकी हत्या कर दी थी। अन्याय उस दिन भी हुआ था जब धर्मेन्द्र सिंह और नरेंद्र यादव जैसे लोगों की मौत की सजा माफ़ कर दी गई थी। इनका अपराध था कि इन्होने एक परिवार के पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया था जिसमे पति पत्नी और उनके तीन बच्चे थे। उस परिवार की पंद्रह साल की लड़की से रेप करने की कोशिश में कामयाब न हो पाने के कारण उन्होंने पूरे परिवार की हत्या कर दी। अन्याय उस दिन भी हुआ था जब एक दस साल के बच्चे को जिन्दा जलाने वाले की मौत की सजा माफ़ कर दी गई थी। अन्याय उस दिन भी हुआ था जब पंजाब के प्यारे सिंह और उसके तीन बेटों को माफ़ कर दिया गया। इन्होने व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते एक शादी के दौरान सत्रह लोगों की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में चार बच्चे भी मारे गए थे।
इन सब अन्यायों का जिम्मेदार कौन है ? अपने आंसू बहाने से पहले राहुल गांधी को ये जरूर सोच लेना चाहिए। इन सबकी सजा माफ़ी की गई थी इन्ही की सरकार द्वारा बनाई गई और संचालित राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी पाटिल द्वारा। उनके इस सजा माफ़ी के फैसले की उस समय हर ओर आलोचना भी हुई थी मगर ना तो राष्ट्रपति जी को इसकी चिंता थी ना राहुल गांधी का ध्यान इस ओर गया। इसीलिये कहते हैं सब समय का खेल है कल जिन्होंने लोगों को दर्द दिया था आज वो खुद तड़प रहे हैं।
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