सामान्यतः मुस्लिमों से पूछा जाए कि उनके लिए पहले देश है या उनका मजहब ? तो उनका सीधा और स्पष्ट जवाब होता है - पहले मजहब।
और
किसी हिन्दू को पूछा जाए कि पहले देश या पहले धर्म ? तो उसका सीधा जवाब होता है- पहले देश।
लेकिन देखा जाए तो ये इतना सीधा और सरल सवाल भी नहीं है जितना हिन्दू इसे समझते हैं, और जितनी आसानी से वो इसका जवाब दे देते हैं।..... ये एक पेंचीदा सवाल है।.....
अभी तो चलो हालात फिर भी थोड़ा-बहुत हिन्दुओं के अनुकूल हैं तो हमारे लिए हमेशा की तरह देश-धर्म एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।.....
लेकिन मान लो कभी भारत पूरी तरह मुस्लिम बहुल बनने जा रहा हो तब आपके पास दो ही विकल्प बचेंगे।..... या तो मुसलमान बन जाओ या ये देश छोड़ कर कहीं और चले जाओ।.....
ऐसी स्थिति में आप क्या करोगे ?
क्या मुसलमान बन जाओगे ?
अगर बन गए तो हिन्दू धर्म खत्म ही हो जाएगा।
जैसे ईराक, ईरान और कभी भारत का हिस्सा रहे अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से वहां का मूल धर्म खत्म हो गया।.....और आज वहां सिर्फ मुसलमान हैं।
या आप हिन्दू धर्म को बचाने के लिए ये देश छोड़ कर किसी दूसरे सुरक्षित देश में बस जाओगे ?
अगर धर्म को बचाने के लिए देश छोड़ दोगे तो उसका क्या जो आज आपसे पूछा जा रहा है कि पहले देश या पहले धर्म ?
आज आपका जवाब है पहले देश।.....
तो तब आप देश के ऊपर धर्म को महत्व क्यों दोगे ?
ये देश जिसमें हम हिन्दुओं की जड़ें हैं, जिसमें हमारे पूर्वजों का खून-पसीना मिला हुआ है ?.... जिसमें हमारा इतिहास है, जिसमें हमारी आत्मा है ? क्या आप इस देश को हमेशा के लिए छोड़ दोगे ?.....
आपको तो यहीं रहना चाहिये, अपने देश में।.... चाहे आप मुसलमान बन जाओ लेकिन रहो तो इसी देश में।
बिल्कुल एक हिन्दू के लिए फैसला करना बहुत मुश्किल है कि ऐसी स्थिति में उसे क्या करना चाहिये।..... क्योंकि वो अपने देश और धर्म से एक साथ जुड़ा हुआ है।.....
इनमें से एक को भी छोड़ने का सवाल उसके लिए ऐसा ही होगा जैसे उससे पूछा जाए कि बता तेरे दोनो बच्चों में से एक को बचाना है तो किसे मरने देगा ?
ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिये, ये आपके लिए यक्ष प्रश्न है।......
या ऐसी स्थिति ही पैदा न हो, उसके लिए आपको क्या करना चाहिये...... ये भी आपके लिए यक्ष प्रश्न है।
विचार कीजिये।
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