अच्छे - खासे पढ़े - लिखे और खाते - पीते पटेल समुदाय के कुछ लोग गुजरात में आरक्षण की मांग कर रहे हैं। और न केवल मांग कर रहे हैं बल्कि सरकार को धमका भी रहे हैं। कल तक जाट और गुर्जर आरक्षण की मांग कर रहे थे और अब ये पटेल शुरू हो गए हैं। दरअसल इन लोगों ने आरक्षण जैसे विषय को मजाक बनाके रख दिया है। जिसके मन में आता है मुँह उठा के आ जाता है आरक्षण मांगने। जब देश आजाद हुआ था तब संविधान बनाने वालों ने देश में दलितों और पिछड़ों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए नौकरियों और शिक्षा में उनके लिए कुछ जगह आरक्षित की थी और ऐसा केवल इसलिए नहीं किया गया कि उस समय वो बहुत पिछड़े हुए थे बल्कि इसलिए किया गया था क्यों कि उस समय तक और काफी हद तक अभी भी समाज के लोगों में उन दलितों और जनजातियों के प्रति समानता का भाव नहीं था। उनका शोषण किया जाता था, उनके साथ भेदभाव किया जाता था, उन्हें कई अधिकारों से वंचित रखा जाता था। संविधान निर्माताओं को आशंका थी कि यदि इन दलितों और उपेक्षितों को समाज के भरोसे छोड़ दिया गया तो समाज का प्रभावशाली वर्ग उन्हें कभी आगे नहीं बढ़ने देगा। इसलिए उन दलितों और उपेक्षितों को आरक्षण देकर ये सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि वो भी समाज के साथ - साथ आगे बढ़ें और सम्मान के साथ जीवन जिएं। अब पटेल समुदाय के कुछ लोग या उनके जैसे अन्य जातियों या समुदाय के लोग जो आज आरक्षण की मांग करते हैं क्या समाज में वो भी भेदभाव का शिकार हुए हैं या समाज में प्रगति करने के लिए किसी ने उन्हें कभी रोका ? नहीं। तो फिर उन्हें आरक्षण क्यों ? केवल इसलिए कि उन्हें लगता है कि वो पिछड़ रहे हैं और हजारों की संख्या में सड़कों में उतरकर वो सरकार को धमका सकते हैं। अगर मात्र पिछड़ना ही आरक्षण का मापदंड होगा तो शायद पूरे देश को आरक्षण देना पड़ जाएगा। क्यों कि देश के लगभग हर नागरिक को ये लगता है कि वो पिछड़ गया है। ये लोकतंत्र नहीं भीड़तंत्र है और जितनी जल्दी ये परंपरा ख़त्म हो जाए उतना देश और समाज के लिए अच्छा है।
और अंत में :- आज जिस गुजरात में पटेलों के आरक्षण की मांग उठ रही है, देश की आजादी के समय उसी गुजरात की जूनागढ़ रियासत का भारत में विलय करवाने वाले जो उस समय के गृह मंत्री थे वो सरदार बल्लभ भाई भी पटेल थे और उसी गुजरात की जिन मुख्यमंत्री के कार्यकाल में ये मांग उठ रही है वो आनंदी बेन भी पटेल हैं। फिर भी कुछ पटेलों को लगता है कि उन्हें आरक्षण मिलना चाहिए।
और अंत में :- आज जिस गुजरात में पटेलों के आरक्षण की मांग उठ रही है, देश की आजादी के समय उसी गुजरात की जूनागढ़ रियासत का भारत में विलय करवाने वाले जो उस समय के गृह मंत्री थे वो सरदार बल्लभ भाई भी पटेल थे और उसी गुजरात की जिन मुख्यमंत्री के कार्यकाल में ये मांग उठ रही है वो आनंदी बेन भी पटेल हैं। फिर भी कुछ पटेलों को लगता है कि उन्हें आरक्षण मिलना चाहिए।