बुधवार, 20 नवंबर 2013

भारत रत्न का औचित्य


२१ अगस्त २००६, देश के लगभग हर न्यूज़ चैनल में एक खबर चली कि "भारत रत्न से सम्मानित प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद विस्मिल्लाह खान की मृत्यु हो गई है" ! इस खबर से देश के लोगों को दुःख भी हुआ था. मगर इससे भी ज्यादा दुःखद समाचार यह था कि अपने जीवन के अंतिम समय में उस्ताद विमिल्लाह खान बड़ी तंगहाली में जी रहे थे और अपनी बीमारी के इलाज के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे भी नहीं थे !

अब प्रश्न ये उठता है कि इतनी पुरानी  बात को इस समय याद करने का क्या औचित्य ? जब कि देश इस समय सचिन को "भारत रत्न " मिलने कि ख़ुशी में झूम रहा है और कुछ लोग हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को "भारत रत्न " न दिए जाने से नाराज हैं। तो औचित्य इस बात से उठता है कि किसी व्यक्ति को "भारत रत्न " देने से होता क्या है ? क्या उस व्यक्ति का सम्मान पहले से ज्यादा बढ़ जाता है या इस सम्मान के न मिलने से उसका सम्मान कुछ कम रह जाता है। 

अब लता मंगेशकर को "भारत रत्न" मिला है तो क्या उनका सम्मान और अधिक बढ़ गया है या ये पुरुस्कार उन्हें नहीं मिलता तो क्या उनके सम्मान में कुछ कमी रह जाती ? शायद नहीं ! कई लोगों को तो ये ही नहीं मालूम होगा कि लता मंगेशकर को "भारत रत्न" मिला भी है या नहीं .जो लोग उन्हें पसंद करते हैं वो उनके गायन के कारण करते हैं न कि उनके भारत रत्न के कारण। कहने का अर्थ यह है कि देश के इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान को वह सम्मान नहीं मिल पाया है जो उसे मिलना चाहिए था और इसके लिए पूरी तरह से सरकार का ढ़ुल मुल रवैया ही जिम्मेदार है ! जितनी तत्परता से उन्होंने अपने पूर्व नेताओं को "भारत रत्न " बांटा है अगर उसी तत्परता से उन्होंने देश के उन नागरिकों को भी "भारत रत्न " दिया होता जिन्होंने वास्तव में देश का सम्मान बढ़ाया है तो ज्यादा अच्छा होता। 

"भारत रत्न" जो कि देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है वह सरकार के रवैये के कारण आज सिर्फ औपचारिकता बन कर रह गया है या फिर सरकार कि तुच्छ राजनैतिक मानसिकता को दिखाने का माध्यम। अब क्या कारण है कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को भारत रत्न दिया गया है, उन्होंने ऐसा कौन सा काम किया है जिससे देश का नाम रौशन हुआ हो या देश के नागरिकों ने सम्मानित महसूस किया हो। बिलकुल, उन्होंने बहुत से ऐसे काम किये होंगे जो प्रशंशनीय हों , मगर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वो देश के प्रधान मंत्री थे और वो सारे काम जो उन्होंने किये हैं उसके लिए उन्हें संविधान में पर्याप्त शक्तियां दी गई हैं ! और इसी काम के लिए जनता ने उन्हें संसद में भेजा था ! और अब कुछ लोग कह रहे हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी को भी भारत रत्न मिलना चाहिए। अगर इसी तरह भारत रत्न का वितरण होना है तो अगला भारत रत्न नरेंद्र मोदी या राहुल गांधी को देने कि घोषणा पहले ही कर देनी चाहिए। 
बहरहाल सचिन और मेजर ध्यानचंद दोनों का जो लोग सम्मान करते हैं वो उनका सम्मान पहले भी करते थे और अभी भी करते हैं।  उन्हें भारत रत्न मिले या न मिले इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला।  यदि फर्क पड़ता तो उस्ताद विस्मिल्लाह खान को इस तरह अपने अंतिम दिन नहीं गुजारने  पड़ते।   

और अंत में : सुना है पहले खिलाड़ियों को भारत रत्न देने का नियम नहीं था मगर अब ये नियम बदला गया है ताकि सचिन को यह सम्मान दिया जा सके। ये अच्छा है मगर इसके साथ यदि नियम यह भी बदला जाता कि अब से किसी नेता को भारत रत्न नहीं दिया जाएगा तो देश के नागरिक शायद इस सम्मान को वास्तव में सर्वोच्च नागरिक सम्मान के रूप में ही लेते ना कि मात्र औपचारिकता के रूप में !